गलती - द मिस्टेक (FINAL पार्ट )

  गलती - द मिस्टेक
                                             Final part



रात बढ़ती जा रही थीपरंतु भौमिक नींद नहीं आ रही थी। अब उसने फिर घड़ी की ओर देखा तो घड़ी में 2.30 का समय हो रहा था। अचानक ही भौमिक को पता नहीं क्या हुआ और वह सीधे बाहर की ओर गया और अपनी कार लेकर सीधे हवेली पहुंच गया। हवेली में वह काफी देर तक घूमता रहा। हर तरफ वह कुछ तलाश करने की कोशिश करता रहा। फिर वह उस हाॅल में भी पहुंचाजहां उन चारों लोगों की हत्या की गई थी। वह हवेली में सुबह बजे तक रहा और फिर सीधे अपने ऑफिस के लिए निकल गया। उसके हालात देखकर कोई भी कह सकता था कि वह रात भर सोया नहीं है। वह सीधे अपने केबिन में गया और बैठकर कुछ सोचने लगा। फिर उसने परमार को फोन लगाया। 

भौमिक- हेलोपरमार कहां हो 

परमार- सरअभी तो घर पर ही थाबस ऑफिस के लिए निकल रहा हूं। आप बताएकुछ जरूरी काम हो तो आपके घर आ जाता हूं। 

भौमिक- परमार मैं घर पर नहीं ऑफिस में हूं। तुम एक काम करोजितनी जल्दी हो सके ऑफिस आ जाओ। 

परमार- जीसर। बस अभी आया। 

इधर परमार सोच रहा था कि ऐसा क्या हुआ जो सर इतनी जल्दी ऑफिस पहुंच गए और मुझे में जल्दी आने का कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ऑफिस में भौमिक अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुरा रहा था। उसके चेहरे को देखकर लग रहा था कि उसे हवेली में हत्या से जुड़ा कोई बड़ा सुराग हाथ लगा है। अब वह केस में आगे बढ़ सकता है। कुछ ही देर में परमार भी ऑफिस पहुंच गया। परमार को देखकर भौमिक ने उसे बैठने के लिए कहा। 

भौमिक- परमारकितनी देर करते होमैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। एक काम करो जल्दी से दो काॅफी बोलो। आज हम साथ में काॅफी पीते हैं। 

परमार- जीसर। अभी बोल देता हूं। 

परमार काॅफी का बोलकर फिर से केबिन में आ जाता है। 

परमार- क्या बात है सरकाफी खुश नजर आ रहे हैं। केस में कोई सुराग हाथ लग गया है क्या

भौमिक- परमार वो सब तो तुम्हें बाद में बताउंगा। फिलहाल एक काम करो। अपनी कस्टडी में वो जो आठों बच्चे हैंउन्हें छोड़ दो। या उनके माता-पिता को फोन कर कह दो कि वे यहां आए और अपने बच्चों को ले जाए। 

परमार- पर सर अभी तो हमने केवल तीन से ही पूछताछ की हैपांच से तो बाकि है। हालांकि तीन से भी कोई खास जानकारी नहीं मिली हैपर हो सकता हे कि बाकि पांच में से कोई कुछ सुराग तक हमें पहुंचा दें। 


भौमिक- परमारमैं कह रहा हूं नाउन्हें छोड़ दो। 

परमार- जीसर। मैं अभी सभी के माता-पिता को फोन कर देता हूं कि वे आकर बच्चों को ले जाए। 

भौमिक- हां परमार। उसके बाद तुम्हें एक काम और करना है। 

परमार- वो क्या सर 

भौमिक- मीडिया को बुला लेना। उन्हें केस के संबंध में जानकारी देते हैं। 

परमार- क्या जानकारी सरअभी तो हमारे पास ही कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। 

भौमिक- परमारआज तुम्हें क्या हो गया हैआज तुम इतने सवाल क्यों कर रहे हो

परमार- साॅरी सर। मैं तो बस पूछ रहा था। 

भौमिक- पूछना भी तो सवाल ही है परमार। 

परमार- साॅरी सर। 

भौमिक- अब तुमसे जो कह रहा हूं वो करते जाओ। और देखों अपने सर का कमाल। 

परमार- सर अब मुझे लग रहा है कि आपने केस साॅल्व कर लिया है। तभी आप इतने खुश भी नजर आ रहे हैं। 

भौमिक- कुछ ऐसा ही समझ लो परमार। 

परमार- तो सर किसने की थी ये हत्याकौन है कातिलऔर आपकों कैसे उसके बारे में पता चला। क्या सुराग हाथ लग गया सर जो आप कातिल तक पहुंच गए

भौमिक- अरेअरे परमार। एक बार में इतने सवाल। तुम्हें भी जवाब मिल जाएगा। तुम बस मीडिया को बुला लो। और हां मीडिया को बुलाने से पहले बच्चों को रवाना करा देना। 

परमार- जीसर। मैं अभी उनके माता-पिता को फोन कर देता हूं कि वे जल्द से जल्द आए और अपने बच्चों को ले जाए। 

इतना कहकर परमार केबिन से बाहर चला जाता है और भौमिक अपनी कुर्सी पर बैठकर टेबल पर रखे पेपपरवेट को घुमाने लगता है। ऐसा उसकी आदत में थाजब भी वह कोई केस साॅल्व कर लेता थातो कुछ देर अपने केबिन में अकेला बैठा रहता था और टेबल पर रखे पेपरवेट को घुमाता था। आज भी वह ऐसा ही कर रहा थाइसका मतलब कुछ घंटों पहले तक जो केस उसे उलझा रहा था और उसकी नींद उड़ा चुका थावह अब उसे साॅल्व कर चुका था। पर आखिर एक ही रात में उसके हाथ ऐसा क्या लग गयाजो केस साॅल्व हो गया। उसने एक बार फिर काॅफी मंगाई और पीने लगा। काॅफी पीते हुए उसके चेहरे में खास मुस्कार बिखरी हुई थी। अधिकारियों और मीडिया का जो प्रेशर उस पर थावह अब हट चुका था। कुछ ही देर में परमार फिर से उसके केबिन में आता है। 

परमार- सरमैंने सभी बच्चों के घर पर फोन कर दिया है वे बस आते ही होंगे। 

भौमिक- ओके परमार। 

परमार- और सर मीडिया को बजे की सूचना दे दी है। 

भौमिक- गुड परमार। 

परमार- सरअब तो बताइए कि आखिर कातिल कौन हैऔर आपकों उसके बारे में कैसे सुराग हाथ लगा

भौमिक- बताता हूं परमारसब बताता हूं। दो बजे मीडिया के सामने सब बताउंगातब तुम भी तो वहीं रहोंगे। तब ही सारी कहानी सुन लेना। 

परमार- जीसर। 

कुछ ही देर में मीडिया भौमिक के ऑफिस तक पहुंच गई थी। शहर में हुए हाईप्रोफाइल मर्डर केस के बारे में जानने के लिए उत्सुक था। हालांकि मीडिया को भी अंदाजा नहीं था कि पुलिस उन्हें क्या बताने वाली हैभौमिक के ऑफिस में पहुंचे मीडियाकर्मी आपस में यही बात करने में लगे थे कि अचानक क्यों बुला लिया है और पुलिस क्या बताना चाह रही है। इस बीच भौमिक परमार के साथ वहां पहंुच जाता है। साथ पुलिस कमिश्नर भी मीडिया के सामने आ जाते हैं। 

कमिश्नर- मीडिया के सभी साथियों का मैं स्वागत करता हूं। 

मीडिया पर्सन 1- सरअचानक बुलाने की वजह क्या आपने मर्डर में कुछ खास कर दिखाया है। 

कमिश्नर- कुछ खास नहीं किया होता तो आपको यहां तक बुलाने की तकलीफ क्यों देतेआप बस हमें पांच मिनट दीजिएआपके सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा। 

इसके बाद कमिश्नर भौमिक की ओर इशारा करता है और भौमिक मीडिया से मुखातिब होता है। 

भौमिक- साथियों मैं जानता हूं आपके मन में कई सवाल उठ रहे हैं। पहले मैं आपको कुछ बता देना चाहता हूंउसके बाद आपके जो भी सवाल होंगे हम उसका जवाब आपको देंगे। 

इसके बाद भौमिक अपनी बात कहना शुरू करता है। इस दौरान कमिश्नरमीडिया के लोग और खासकर परमान बड़े गौर से उसकी बात सुनने को तैयार हो जाते हैं। भौमिक भी अपनी बात कहना शुरू करता है। 


भौमिक- जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आज से करीब 20 दिन पहले गोवा-मुंबई हाइवे पर एक हवेली में शहर के नामी डाॅक्टर अविनाश सक्सेना और उनके परिवार की किसी ने हत्या कर दी थी। मामले में शहर के कुछ बड़े बिजनेस मैन और कुछ मंत्रियों के बच्चों के नाम भी सामने आए थेइस कारण यह केस हाईप्रोफाइल बन गया था। मेरे अधिकारियों ने इस केस की जिम्मेदारी मुझे दी थी। केस को जल्द सॉल्व करने का प्रेशर मुझ पर था और आप लोगों ने भी प्रेशर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 

मीडिया पर्सन 2- तो क्या आपने केस साॅल्व कर लिया है

भौमिक- जैसे कि मैंने कहा कि पहले मुझे मेरी बात कह लेने दीजिएफिर हम आपके हर सवाल का जवाब देंगे। वैसे आपके सवाल का जवाब दिए देता हूं कि हांमैंने केस साॅल्व कर लिया है। 

मीडिया पर्सन 3- पर कल दिन तक तो आपने कोई अपडेट नहीं दी थी। एक रात में अचानक कोई कातिल आपके हाथ कैसे लग गया

भौमिक- जीकल दिन तक मैंने इस केस के संबंध में कोई अपडेट नहीं दी थीक्योंकि उस समय मेरे पास भी कोई अपडेट नहीं थी। जो कुछ भी हुआ है वह शाम के बाद हुआ है। 

मीडिया पर्सन 4 - तो फिर बताइए कौन है कातिलकिसने डाॅक्टर और उसकी फैमिली को मारा और क्यों मारा

भौमिक- जीवहीं बताने के लिए मैं यहां खड़ा हूं। 

भौमिक की बात सुनकर हाॅल में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। भौमिक ने फिर बोलना शुरू किया। 

भौमिक- डाॅ. सक्सेना और उनके परिवार की हत्या खुद डाॅ. अविनाश सक्सेना ने ही की है। 

भौमिक की यह बात सुनकर हर कोई आश्चर्य में पड़ गया था। खासकर कमिश्नर और परमार को मानों झटका लगा हो। वहीं मीडिया के लोग भी भौमिक की इस बात को सुनकर हैरान रह गए थे। 

भौमिक- मैं जानता हूं कि फिलहाल आप सभी को मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा हैपरंतु हमारे पास ऐसे सबूत हैजिससे यह साबित होता है कि पूरे परिवार की हत्या करने के बाद डाॅ. अविनाश ने भी आत्महत्या कर ली। उन्होंने परिवार की हत्या क्यों की यह राज उस परिवार की मौत के साथ ही दफन हो गया है। 

मीडिया पर्सन 1- कैसे सबूत है आपके पास

भौमिक- हमारे पास कुछ फोटोग्राफ हैजिसमें डाॅ. सक्सेना एक-एक कर अपने परिवार के सदस्यों की हत्या करते हुए साफ नजर आ रहे हैं। 

मीडिया पर्सन 3- ये फोटोग्राफ आपको कहां और कैसे मिले

भौमिक- कल रात को मैं हवेली में गया थावहीं मुझे ये फोटोग्राफ मिले है। 

मीडिया पर्सन 2- पहले भी तो आप कई बार हवेली में गए हैंतो पहले आपको ये फोटोग्राफ क्यों नहीं मिले

भौमिक- हम भी इंसान हैहमसे भी चूक हो जाती है। कल रात को एक बार फिर मैंने हवेली का मुआयना किया तो मुझे यह फोटोग्राफ मुझे मिल गए। 

मीडिया पर्सन 4- ये फोटोग्राफ किसने खीेंचे थे

भौमिक- कुछ देर तक चुप रहने के बाद - मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 

मीडिया पर्सन 1- इसका मतलब है कि ये केस अब बंद हो चुका है

भौमिक- मेरे हिसाब से तो अब इस केस में कुछ बचा नहीं है। क्योंकि लाशों से तो नहीं पूछ सकता कि डाॅक्टर ने अपने पूरे परिवार की हत्या क्यों की थी

इसके बाद सभी मीडिया के लोग वहां से चले जाते हैं और उनके बाद कमिश्नर भी भौमिक से केस के संबंध में कुछ बात करके चले जाते हैं। इसके बाद भौमिक और परमार एक बार फिर भौमिक के केबिन में आज जाते हैं। भौमिक एक बार फिर अपनी आदत के अनुसार अपनी चेयर पर बैठकर टेबल पर रखे पेपरवेट को घुमाने लगता है। परमार अभी खड़ा था। भौमिक उसे बैठने का इशारा करता है और परमार वहीं रखी दूसरी चेयर पर बैठ जाता है। भौमिक उसे देखकर मुस्कुराता है। 

भौमिक- मैं जानता हूं परमार अब भी तुम्हारे मन में कई सवाल उठ रहे हैं। और तुम चाहते हो कि मैं जल्दी से पूरी बात तुम्हें बता दूं। 

परमार- जीसर। 

भौमिक- वैसे भी तुम इस केस से शुरू से जुड़े हो तो तुम्हें हर बात जानने का हक भी है। 

परमार- जीसर। अब बताइए ना कि सिर्फ एक रात में ही आपने केस कैसे साॅल्व कर लिया

भौमिक- देखा जाए तो बहुत कुछ खास नहीं हुआपर सोचा जाए तो यह बहुत आश्चर्यजनक था। 

परमार- मतलब सर। 

भौमिक- मतलब ये परमार कि कल यहां से जाने के बाद भी मेरे दिमाग में इस केस को लेकर बातें चल रही थीजो हम कई दिनों से सोच रहे हैं। ऐसे ही मैं कल भी सोच रहा था। मुझे रात को नींद नहीं आ रही थीइस कारण गाड़ी उठाई और रात को करीब 2.30 बजे मैं हवेली पहुंच गया।


परमार- अकेले ही सरमुझे काॅल कर देते तो मैं भी आपके साथ आ जाता। 

भौमिक- पहले मैंने सोचा था परमार कि तुम्हें काॅल करूंपर रात ज्यादा हो गई थीइसलिए मैंने काॅल नहीं किया और अकेले ही हवेली पहुंच गया।

परमार- फिर क्या हुआ सर

भौमिक- हवेली तो पहुंच ही गया थातो हमेशा की तरह सुराग की खोज में लग गयाये सोचकर कि शायद हर बार कि तरह हमारी नजर से कुछ चूक तो नहीं गया। मैंने हवेली के हर कमरे को बड़े गौर से देखापर मुझे कुछ नहीं मिला। इसके बाद मैं उस हाॅल में आयाजहां हमें सारी लाशें मिली थी। 

परमार- फिर सर

भौमिक- हाॅल को भी मैंने बड़े गौर से देखा पर मुझे कुछ नजर नहीं आया। मुझे उस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा थामैंने गुस्से में हाॅल की एक दीवार पर मुक्का मारा। 

परमार- ओहसर ये क्या किया आपने

भौमिक- परमार वो एक मुक्का इतने काम का रहा कि केस चुटकी बजाते हुए साॅल्व हो गया। 

परमार- क्या मतलब सरआपके मुक्के ने ऐसा क्या दिखा दिया आपको

भौमिक- मुझे क्या दिखा दिया वो तुम खुद भी देख लो। 

भौमिक अपने टेबल की दराज से एक कैमरा निकालकर टेबल पर रख देता है। 

परमार- ये तो कोई कैमरा लगता है सर

भौमिक- हांपरमार ये कैमरा ही है। और इसी कैमरे ने बस चुटकी बजाते हुए इस अनसुलझे से लग रह केस को साॅल्व कर दिया। 

परमार- अरे वाह सर। 

भौमिक- इसके बाद जब मैंने इसे देखा तो मुझे पूरा केस समझ आ गया। 

परमार- तो मामला क्या था सरडाॅक्टर ने परिवार की हत्या क्यों की

भौमिक- वहीं बता रहा हूं परमार। और सबसे चौंकाने वाली बात भी इस केस की यही है। मैं मीडिया को भी कारण बता सकता थापर उसके बाद लोगों का मेडिकल और फिर डाॅक्टरी पेशे से भरोसा उठ जाताइसलिए मैंने कह दिया कि यह राज तो डाॅक्टर के साथ ही खत्म हो गया। 

परमार- ओकेसर। वैसे आपको क्या पता चला कि उसने क्यों मारा?

भौमिक- जैसा कि हम जानते हैं परमार कि डाॅक्टर सक्सेना मनो विज्ञान में भी रूचि रखते थे। लंदन में उन्होंने इसकी डिग्री भी ली है और वे कुछ प्रयोग भी कर रहे थे। 

परमार- जीसर। 

भौमिक- मुझे लगता है परमार कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग को लेकर कुछ ज्यादा ही जुनूनी हो गया था।


परमार- मतलब सर

भौमिक- मतलब ये परमार कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग को सही करने के लिए कुछ भी कर सकता था और उसने वहीं किया भी। इस डाॅक्टर ने अपने मनोविज्ञान को सहीं साबित करने के लिए हवेली में पहुंचे आठों बच्चों को हिप्नोटाइज यानि कि सम्मोहित किया। इसके साथ ही उसने इनके सम्मोहन में हवेली की पूरी दास्तां याद ना रहे इसके लिए कुछ की वर्ड भी दिएजिससे की जब भी कोई उन शब्दों को उनके सामने दोहराए या कहे तो ये जैसा रिएक्शन यहां कर रहे थेवैसा ही करें। इसके साथ ही उन सब के दिमाग में यह भी बैठा दिया कि कत्ल उन्हीं लोगों ने किया है। 

परमार- ओहये तो बहुत खतरनाक प्रयोग था डाॅक्टर का। 

भौमिक- नहीं परमार। ये तो कुछ नहीं। डाॅक्टर ने इसके बाद जो किया वो इससे भी ज्यादा खतरनाक था। 

परमार- इससे ज्यादा क्या किया डाॅक्टर ने

भौमिक- इससे ज्यादा ये किया उसने कि पहले उसने अपने परविार के हर व्यक्ति को और फिर खुद को भी सम्मोहित किया। सम्मोहन भी ऐसा कि सम्मोहन के दौरान उन्हें दर्द महसूस न हो। शायद वह यही प्रयोग करना चाह रहा था। ताकि ऑपरेशन के समय किसी मरीज को बेहोश ना करना पड़े। 

परमार- ये कैसा प्रयोग है सर

भौमिक- जो भी है परमार। पर मुझे लगता है कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग के लिए पागल हो गया था। उसने सभी को सम्मोहित करने के बाद ये देखने के लिए कि उन्हें दर्द हो रहा है या नहीं सब पर चाकू से वार किए। उसने सभी पर चार से पांच बार वार किए। जिससे सभी की मौत हो गई। इसके बाद उसने खुद पर भी यही प्रयोग किया और खुद पर भी वार किएज्यादा खून बह जाने के कारण वह बेहोश हो गया और फिर उसकी भी मौत हो गई। चुंकि वो डाॅक्टर थाइस कारण उसने गल्ब्स पहले हुए थेइस कारण हमें चाकू पर किसी की उंगलियों के निशान नहीं मिले। और कोई चीखा या चिल्लाया भी इसलिए नहीं कि वे सभी सम्मोहित थे। एक तरह से यूं कह सकते हैं कि डाॅक्टर का प्रयोग सफल हो गया था। 

परमार- ओहये डाॅक्टर तो सचमूच ही पागल था सर। 

भौमिक- हां परमार। 

परमार- पर सर ये कैमरा कैसे था

भौमिक- मैंने इसका भी पता लगाया है परमार। ये सब एक गलती द मिस्टेक के कारण हुआ है।परमार- मतलब सर। 

भौमिक- तुम्हें याद है कि शाह ने बताया कि वो हवेली को एक रिसोर्ट के रूप में तैयार कर रहा था

परमार- जीसर। 

भौमिक- इस दौरान वही रिसोर्ट या यूं कहे कि हवेली की दीवारों पर लाइट और कुछ खास जगहों पर कैमरे लगवा रहा था। दोनों काम एक साथ चल रहे थे। इस दौरान लाइट वाला लाइट लगाकर चला गया था और कैमरे वाला अपना काम कर रहा था। उनमें से एक ने कैमरा ठीक से काम कर रहा है या नहीं यह देखने के लिए उसका कनेक्शन किया था। जो वह बाद में निकालना भूल गया। उसकी यहीं गलती हमारे केस के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वांइट साबित हुई है। 

परमार- क्या किसी की एक गलती ने इस अद्भूत केस को साॅल्व कर दिया सर

भौमिक- हांपरमार अद्भूत केस एक अद्भूत तरीके से ही साॅल्व हुआ है। 

परमार- हांसर आपने बिल्कुल सही कहा। 

इसके बाद दोनों एक बार फिर साथ ऑफिस से बाहर निकलते हैं और अपने घरों की ओर चल देते हैं। भौमिक को संतोष था कि उसके पास जो केस आया वो आखिर साॅल्व हो गया। वो मन ही मन उसे कैमरे वाले को एक गलती करने के लिए धन्यवाद दे रहा था। वहीं परमार यह सोच रहा था कि भौमिक के पास जो भी केस आता है वह कभी अधुरा नहीं रहता। 

गलती द मिस्टेक कहानी आपको कैसी लगी आप कमेंट बाॅक्स में जाकर जरूर बताइगा। आपके शब्द मेरे लिए अनमोल है और मेरी लेखनी को और भी आगे जाने के लिए प्रेरित करेंगे। 

आप सभी का धन्यवाद 

गलती - द मिस्टेक (पार्ट 6)

गलती - द मिस्टेक

पार्ट 6

अगले दिन जब भौमिक ऑफिस पहुँचता है तो परमार वहां पहले से मौजूद था। भौमिक अपने केबिन में जाता है और फिर परमार को अपने केबिन में बुलाता है। 
भौमिक- अरे, परमार आज तुम इतनी जल्दी ऑफिस आ गए
परमार - जी, सर। बात ही कुछ ऐसी थी कि आना पड़ा। 
भौमिक- अच्छा क्या बात थी परमार
परमार- सर, लंदन से सुमित शाह आ गए हैं और कुछ ही देर में यहां पहुंचने वाले हैं। 
भौमिक- अरे, वाह। ये तो वाकई अच्छी बात है। पर वो तो कल आने वाले थे ना
परमार - जी सर, पर वे एक दिन पहले ही आ गए। 
भौमिक- ओके गुड, अब हमें केस में कुछ लीड मिल सकती है। देखते है वे आकर क्या बताते हैं ?
परमार- जी, सर। 
तभी एक सिपाई भौमिक के केबिन में आता है और उससे कहता है कि कोई सुमित शाह उनसे मिलना चाहते हैं। भौमिक उन्हें तुरंत भेजने के लिए कहता है। सिपाई भौमिक को सेल्यूट कर वापस चला जाता है। कुछ ही देर में भौमिक के केबिन का गेट ओपन होता है और करीब एक 50 साल एक एक व्यक्ति केबिन में प्रवेश करता है। आंखों पर चश्मा, कोर्ट और टाई के साथ सुमित शाह भौमिक से हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाता है। 
शाह- हेलों एसीपी मैं सुमित शाह। आपके ऑफिसर का मेरे पास कई बार फोन आया था, परंतु कुछ जरूरी काम होने के कारण जल्द नहीं आ सका। इसके लिए आपसे माफी चाहता हूं। 
भौमिक- कोई बात नहीं शाह साहब। वाकई कोई जरूरी काम ही रहा होगा, वरना आपकी हवेली में इतनी बड़ी घटना हो गई और आप ना आते ऐसा मुझे नहीं लगता। 
शाह- जी, बिल्कुल सही कहा आपने। 
भौमिक- अरे, आप खड़े क्यों है? प्लीज बैठिए। और ये बताइये क्या लेंगे आप
शाह- जी, फिलहाल तो कुछ नहीं। बाकि आप जो चाहे। 
भौमिक- परमार एक काम करो काॅफी का इंतजाम करो। और तुम भी यहां आ जाओ। 
परमार- जी, सर। अभी आया। 
भौमिक- तो शाह साहब क्या आप घटना के बारे में हमें कुछ बता सकते हैं
शाह- आई एम साॅरी सर, घटना के बारे में तो मैं कुछ नहीं जानता। पर वो हवेली मेरी ही है। पुश्तैनी हवेली है। कुछ समय पहले ही मैंने उसे रिसोर्ट बनाने का सोचा था। इसके लिए कुछ दिन पहले काम भी चला था। लंदन अचानक जाने के कारण काम रूक गया था। उसके बाद ये घटना हो गई। 
भौमिक- ओके। क्या आप डाॅ. अविनाश सक्सेना को जानते थे
शाह- जी, बिल्कुल सर। लंदन में भी उनसे मेरी कई बार मुलाकात हुई है। वे मेरे अच्छे दोस्त थे। वे कई बार मेरी हवेली देखने के लिए मुझसे कह चुके थे। उस दिन वे मेरी हवेली देखने और वहां कुछ समय रहने के लिए ही आए थे। 
भौमिक इस बात पर चौंक जाता है कि डाॅ. अविनाश शाह से पूछकर वहां रहने के लिए आए थे, वो भी पूरे परिवार के साथ। जबकि उनका खुद का इतना बड़ा घर है।
भौमिक- तो शाह साहब क्या आप बता सकते हैं कि वे यहां कितने दिन रहने वाले थे ?
शाह- जी, उन्होंने मुझसे करीब 7 दिन रहने के लिए कहा था। उन्होंने ये भी बताया था कि अपने पूरे परिवार के साथ यहां रहेंगे। 
भौमिक- तो क्या उनके साथ कोई और भी आने वाला था
शाह- इस बारे में मैं कुछ कह नहीं सकता। हालांकि उन्होंने मुझे सिर्फ अपने परिवार के बारे में ही बताया था। 
इस बीच परमार भी काॅफी लेकर आ जाता है और फिर वहीं खड़ा हो जाता है। भौमिक उसे बैठने के लिए कहता है। 
भौमिक- शाह साहब आपकी और डाॅ. सक्सेना की लंदन में कैसे मुलाकात हुई थी
शाह- जी हम एक पार्टी में मिले थे। वैसे तो वे खुद एक बहुत बड़े हार्ट सर्जन थे। फिर भी वे मनो विज्ञान में खासी रूचि रखते थे। मेरे एक मित्र से मैंने उन्हें मिलवाया था। वे मनोविज्ञान को लेकर कुछ प्रयोग करना चाहते थे। इस कारण वे करीब 3 साल तक लंदन में ही रहे। इस दौरान हमारी कई बार मुलाकात हुई है। 
भौमिक- क्या आप बता सकते हैं कि वे क्या प्रयोग करना चाहते थे मनो विज्ञान में?
शाह- जी, वैसे तो मैं बहुत ज्यादा नहीं जानता। पर एक बार बात-बात में उन्होंने कहा था कि वे मनो विज्ञान और उनके डाॅक्टरी ज्ञान का मेल कर मरीजों के के लिए कुछ नया करने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि दिल के मरीजों को मनो विज्ञान से भी ठीक किया जा सके। 
भौमिक इस बात फिर से चौंक जाता है। 
भौमिक- मनो विज्ञान से दिल की बीमारियों का इलाज ?
शाह- जी वो कह तो कुछ ऐसा ही रहे थे, पर वे अपने प्रयोग में कितने सफल हुए यह मुझे नहीं पता। 
भौमिक- शाह साहब क्या आप इस हत्या के संबंध में कुछ बता सकते हैं? मेरा मतलब उनका कोई दुश्मन
शाह- जी नहीं सर। जितना मैं उन्हें जानता हूं उनका कोई दुश्मन नहीं था। वो तो वैसे भी काफी खुशमिजाज व्यक्ति थे और ऐसे व्यक्ति का कोई दुश्मन कैसे हो सकता है
भौमिक- शाह साहब, एक सवाल और। हवेली या यूं कहूं कि रिसोर्ट में क्या काम हो रहा था ? काम बंद होने के बाद वहां कोई चौकीदार भी नहीं था
शाह- जी, सर। रिसोर्ट का सारा काम मैं अपनी निगरानी में करवा रहा था। मेरे अचानक जाने  के कारण वहां काम बंद हो गया। पहले वहां एक चौकीदार रहता था। काम चलने के कारण वह कुछ दिन अपने गांव चला गया था। मुझे अचानक जाना पड़ा इसलिए मैं उसे बता नहीं पाया, नही तो हवेली हमेशा चौकीदार रहता है।
भौमिक- ओके शाह साहब। वैसे आप भारत में कितने दिन है? मुझे आगे भी आपकी मदद की आवश्यकता हो सकती है। 
शाह- मैं करीब 10 दिन तक यहां हूं। आपको जब भी मेरी जरूरत हो मुझे काॅल कर दिजिएगा, मैं हाजिर हो जाउंगा। 
इतना कहकर शाह चला जाता है। 
भौमिक- परमार, केस को लेकर तो इससे भी कोई लीड नहीं मिली। पर एक बात चौंकाने वाली है कि हार्ट सर्जन मनो विज्ञान में क्या प्रयोग करना चाह रहा था
परमार - जी, सर मैं भी इतनी देर से यही सोच रहा था। कि दिल की बीमारी में मनो विज्ञान क्या मदद करेगा। मनो विज्ञान तो दिमागी बीमारियों के लिए काम आता है। 
भौमिक- हां, परमार। तुम एक काम करो अब इस डाॅ. अविनाश सक्सेना की कुंडली निकालों। 
परमार- सर निकाल चुका हूं। शाह के इंतजार में ये सारे काम कर चुका हूं। 
भौमिक- वेरी गुड परमार। लगता है तुम बहुत ही जल्दी आगे जाओगे। तो क्या पता चला है इस डाॅ. सक्सेना के बारे में। 
परमार- सर, मेडिकल की डिग्री तो उसने यही से ली है। कुछ समय प्रेक्टिस करने के लिए यह लंदन भी गया था। इस दौरान इसका पूरा परिवार यही रहता था। परिवार में बस वहीं लोग है, जिनकी हत्या हुई है। मुंबई के साथ कई देशों में हार्ट के ऑपरेशन के लिए इनका आना-जाना होता रहता था। कम उम्र में ही इन्होंने काफी तरक्की कर ली थी। 
भौमिक- बहुत खूब परमार। तुम तो उसकी पूरी कुंडली ले आए हो। 
परमार-थैक्यू सर। 
भौमिक- अब एक काम करो परमार। जितनी जल्दी हो सके डाॅ. की लंदन की कुंडली भी निकालो। यह वहां क्या करता था। मनो विज्ञान में इसने क्या किया है, इसका प्रयोग क्या था, क्यों था। और इस प्रयोग में यह कितना सफल रहा। सारी जानकारी मुझे कल तक चाहिए ही। 
परमार- जी, सर। 
इसके बाद परमार चला जाता है। भौमिक एक बार फिर केस के बारे में सोचने लगता है। भौमिक सोच रहा था कि उसे उम्मीद थी कि शाह के आने के बाद केस में कोई सुराग हाथ लगेगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि वह तो केस को और उलझा कर चला गया है। डाॅक्टर तो शाह से पूछकर अपने परिवार के सा हवेली गया था, पर ये बच्चे क्यों गए थे ? उसने फिर से परमार को बुलाया। 
भौमिक- परमार, तुमने पता किया था कि ये बच्चे वहां क्या करने गए थे
परमार- जी सर, मैंने पता किया था। हवेली से कुछ दूर ही बच्चों की गाड़ी मिली थी, वो खराब हो गई थी। रात बिताने के लिए ये लोग वहां पहुँच गए थे। वहां पास के गांव के कुछ लोगों ने ही उन्हें इस हवेली के बारे में बताया था। 
भौमिक- ओके, परमार, अब तुम जल्दी से जल्दी डाॅक्टर की जानकारी लंदन से मंगाने का कुछ करो। 
परमार- मेरी बात हो गई है सर, शाम तक उसकी पूरी जानकारी आपकी टेबल पर होगी। 
भौमिक- ओके परमार। 
परमार के जाने के बाद भौमिक भी कुछ देर ऑफिस में रूक कर चला जाता है। शाम को जब वह ऑफिस आता है तो परमार उसका इंतजार कर रहा था। 
परमार- सर, लंदन से डाॅक्टर अविनाश के संबंध में हमने जो जानकारी मांगी थी वह आ गई है। 

भौमिक- वैरी गुड, परमार। तो क्या पता चला है
परमार- सर, डाॅक्टर अविनाश करीब 3 साल से भी ज्यादा समय तक लंदन में रहे थे। इस दौरान उन्होंने वहां से मनो विज्ञान का पूरा कोर्स किया है और उसकी डिग्री भी ली है। इसके साथ ही वे जो प्रयोग करना चाह रहे थे, वह यह था कि किसी भी मरीज को दिल बीमारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति को समझा जा सके और उसे सम्मोहित कर बीमारी का इलाज किया जा सके। इससे ज्यादा उनके प्रयोग के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। 
भौमिक- पर परमार इससे भी हमारे केस को लेकर कोई सुराग नहीं मिल रहा है। हम केस में आगे कैसे बढ़े
परमार- मैंने भी इस बारे में सोचा था सर। पर कुछ समझ नहीं आ रहा है। आखिर माजरा क्या है
भौमिक- हां, परमार वहीं तो केस साॅल्व कैसे होगा
यहां से एक बार फिर दोनों अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं। घर पहुंचकर भी भौमिक के दिमाग में सिर्फ केस को लेकर ही बातें चल रही थी। वह बार-बार यही सोच रहा था कि कहीं से कुछ भी एक सुराग हाथ लगे। वो अपने दिमाग में एक बार फिर पूरे केस की बातों को सोचता है। इसके बाद भी उसे कोई जवाब नहीं मिलता है। रात के करीब दो बज चुके थे और उसे नींद नहीं आ रही थी। वह किसी भी हाल में बस केस को साॅल्व करना चाह रहा था। मीडिया और उसके अधिकारी उस पर केस को जल्द साॅल्व करने का दबाव बना रहे थे। भौमिक और परमार की हर कोशिश के बाद भी हत्या के संबंध में कोई सुराग उनके हाथ नहीं लग रहा था। 
 क्रमशः