गलती - द मिस्टेक
पार्ट 6
अगले दिन जब भौमिक ऑफिस पहुँचता है तो परमार वहां
पहले से मौजूद था। भौमिक अपने केबिन में जाता है और फिर परमार को अपने केबिन में
बुलाता है।
भौमिक- अरे, परमार आज तुम इतनी
जल्दी ऑफिस आ गए ?
परमार - जी, सर। बात ही कुछ ऐसी
थी कि आना पड़ा।
भौमिक- अच्छा क्या
बात थी परमार ?
परमार- सर, लंदन से सुमित शाह
आ गए हैं और कुछ ही देर में यहां पहुंचने वाले हैं।
भौमिक- अरे, वाह। ये तो वाकई
अच्छी बात है। पर वो तो कल आने वाले थे ना?
परमार - जी सर, पर वे एक दिन पहले
ही आ गए।
भौमिक- ओके गुड, अब हमें केस में
कुछ लीड मिल सकती है। देखते है वे आकर क्या बताते हैं ?
परमार- जी, सर।
तभी एक सिपाई भौमिक
के केबिन में आता है और उससे कहता है कि कोई सुमित शाह उनसे मिलना चाहते हैं।
भौमिक उन्हें तुरंत भेजने के लिए कहता है। सिपाई भौमिक को सेल्यूट कर वापस चला
जाता है। कुछ ही देर में भौमिक के केबिन का गेट ओपन होता है और करीब एक 50 साल एक एक व्यक्ति
केबिन में प्रवेश करता है। आंखों पर चश्मा, कोर्ट और टाई के साथ सुमित शाह भौमिक से हाथ मिलाने के लिए
हाथ आगे बढ़ाता है।
शाह- हेलों एसीपी
मैं सुमित शाह। आपके ऑफिसर का मेरे पास कई बार फोन आया था, परंतु कुछ जरूरी काम होने के कारण जल्द नहीं आ सका। इसके
लिए आपसे माफी चाहता हूं।
भौमिक- कोई बात
नहीं शाह साहब। वाकई कोई जरूरी काम ही रहा होगा, वरना आपकी हवेली
में इतनी बड़ी घटना हो गई और आप ना आते ऐसा मुझे नहीं लगता।
शाह- जी, बिल्कुल सही कहा
आपने।
भौमिक- अरे, आप खड़े क्यों है? प्लीज बैठिए। और ये
बताइये क्या लेंगे आप?
शाह- जी, फिलहाल तो कुछ
नहीं। बाकि आप जो चाहे।
भौमिक- परमार एक
काम करो काॅफी का इंतजाम करो। और तुम भी यहां आ जाओ।
परमार- जी, सर। अभी आया।
भौमिक- तो शाह साहब क्या आप घटना के बारे में हमें कुछ बता
सकते हैं?
शाह- आई एम साॅरी
सर, घटना के बारे में तो मैं कुछ नहीं जानता। पर वो हवेली मेरी ही है। पुश्तैनी
हवेली है। कुछ समय पहले ही मैंने उसे रिसोर्ट बनाने का सोचा था। इसके लिए कुछ दिन
पहले काम भी चला था। लंदन अचानक जाने के कारण काम रूक गया था। उसके बाद ये घटना हो
गई।
भौमिक- ओके। क्या
आप डाॅ. अविनाश सक्सेना को जानते थे ?
शाह- जी, बिल्कुल सर। लंदन
में भी उनसे मेरी कई बार मुलाकात हुई है। वे मेरे अच्छे दोस्त थे। वे कई बार मेरी
हवेली देखने के लिए मुझसे कह चुके थे। उस दिन वे मेरी हवेली देखने और वहां कुछ समय
रहने के लिए ही आए थे।
भौमिक इस बात पर चौंक जाता है कि डाॅ.
अविनाश शाह से पूछकर वहां रहने के लिए आए थे, वो भी पूरे परिवार के साथ। जबकि उनका खुद का इतना बड़ा घर
है।
भौमिक- तो शाह साहब
क्या आप बता सकते हैं कि वे यहां कितने दिन रहने वाले थे ?
शाह- जी, उन्होंने मुझसे
करीब 7 दिन रहने के लिए कहा था। उन्होंने ये भी बताया था कि अपने पूरे परिवार के साथ यहां
रहेंगे।
भौमिक- तो क्या
उनके साथ कोई और भी आने वाला था?
शाह- इस बारे में
मैं कुछ कह नहीं सकता। हालांकि उन्होंने मुझे सिर्फ अपने परिवार के बारे में ही
बताया था।
इस बीच परमार भी
काॅफी लेकर आ जाता है और फिर वहीं खड़ा हो जाता है। भौमिक उसे बैठने के लिए कहता
है।
भौमिक- शाह साहब
आपकी और डाॅ. सक्सेना की लंदन में कैसे मुलाकात हुई थी?
शाह- जी हम एक
पार्टी में मिले थे। वैसे तो वे खुद एक बहुत बड़े हार्ट सर्जन थे। फिर भी वे मनो
विज्ञान में खासी रूचि रखते थे। मेरे एक मित्र से मैंने उन्हें मिलवाया था। वे
मनोविज्ञान को लेकर कुछ प्रयोग करना चाहते थे। इस कारण वे करीब 3 साल तक लंदन में ही
रहे। इस दौरान हमारी कई बार मुलाकात हुई है।
भौमिक- क्या आप बता
सकते हैं कि वे क्या प्रयोग करना चाहते थे मनो विज्ञान में?
शाह- जी, वैसे तो मैं बहुत
ज्यादा नहीं जानता। पर एक बार बात-बात में उन्होंने कहा था कि वे मनो विज्ञान और
उनके डाॅक्टरी ज्ञान का मेल कर मरीजों के के लिए कुछ नया करने का प्रयास कर रहे
हैं। ताकि दिल के मरीजों को मनो विज्ञान से भी ठीक किया जा सके।
भौमिक इस बात फिर
से चौंक जाता है।
भौमिक- मनो विज्ञान
से दिल की बीमारियों का इलाज ?
शाह- जी वो कह तो
कुछ ऐसा ही रहे थे, पर वे अपने प्रयोग में कितने सफल हुए यह मुझे नहीं पता।
भौमिक- शाह साहब
क्या आप इस हत्या के संबंध में कुछ बता सकते हैं? मेरा मतलब उनका कोई
दुश्मन ?
शाह- जी नहीं सर।
जितना मैं उन्हें जानता हूं उनका कोई दुश्मन नहीं था। वो तो वैसे भी काफी खुशमिजाज
व्यक्ति थे और ऐसे व्यक्ति का कोई दुश्मन कैसे हो सकता है?
भौमिक- शाह साहब, एक सवाल और। हवेली
या यूं कहूं कि रिसोर्ट में क्या काम हो रहा था ? काम बंद होने के
बाद वहां कोई चौकीदार भी नहीं था?
शाह- जी, सर। रिसोर्ट का
सारा काम मैं अपनी निगरानी में करवा रहा था। मेरे अचानक जाने के कारण वहां काम
बंद हो गया। पहले वहां एक चौकीदार रहता था। काम चलने के कारण वह कुछ दिन अपने गांव चला गया था। मुझे अचानक जाना
पड़ा इसलिए मैं उसे बता नहीं पाया, नही तो हवेली हमेशा चौकीदार रहता है।
भौमिक- ओके शाह
साहब। वैसे आप भारत में कितने दिन है? मुझे आगे भी आपकी मदद की आवश्यकता हो सकती है।
शाह- मैं करीब 10 दिन तक यहां हूं।
आपको जब भी मेरी जरूरत हो मुझे काॅल कर दिजिएगा, मैं हाजिर हो
जाउंगा।
इतना कहकर शाह चला
जाता है।
भौमिक- परमार, केस को लेकर तो
इससे भी कोई लीड नहीं मिली। पर एक बात चौंकाने वाली है कि हार्ट सर्जन मनो विज्ञान में क्या प्रयोग करना
चाह रहा था ?
परमार - जी, सर मैं भी इतनी देर
से यही सोच रहा था। कि दिल की बीमारी में मनो विज्ञान क्या मदद करेगा। मनो विज्ञान
तो दिमागी बीमारियों के लिए काम आता है।
भौमिक- हां, परमार। तुम एक काम
करो अब इस डाॅ. अविनाश सक्सेना की कुंडली निकालों।
परमार- सर निकाल चुका हूं। शाह के इंतजार में ये सारे काम
कर चुका हूं।
भौमिक- वेरी गुड
परमार। लगता है तुम बहुत ही जल्दी आगे जाओगे। तो क्या पता चला है इस डाॅ. सक्सेना
के बारे में।
परमार- सर, मेडिकल की डिग्री
तो उसने यही से ली है। कुछ समय प्रेक्टिस करने के लिए यह लंदन भी गया था। इस दौरान
इसका पूरा परिवार यही रहता था। परिवार में बस वहीं लोग है, जिनकी हत्या हुई
है। मुंबई के साथ कई देशों में हार्ट के ऑपरेशन के लिए इनका आना-जाना होता रहता था। कम उम्र में ही
इन्होंने काफी तरक्की कर ली थी।
भौमिक- बहुत खूब
परमार। तुम तो उसकी पूरी कुंडली ले आए हो।
परमार-थैक्यू सर।
भौमिक- अब एक काम
करो परमार। जितनी जल्दी हो सके डाॅ. की लंदन की कुंडली भी निकालो। यह वहां क्या
करता था। मनो विज्ञान में इसने क्या किया है, इसका प्रयोग क्या था, क्यों था। और इस प्रयोग में यह कितना सफल रहा। सारी जानकारी
मुझे कल तक चाहिए ही।
परमार- जी, सर।
इसके बाद परमार चला
जाता है। भौमिक एक बार फिर केस के बारे में सोचने लगता है। भौमिक सोच रहा था कि
उसे उम्मीद थी कि शाह के आने के बाद केस में कोई सुराग हाथ लगेगा, पर ऐसा कुछ नहीं
हुआ। बल्कि वह तो केस को और उलझा कर चला गया है। डाॅक्टर तो शाह से पूछकर अपने
परिवार के सा हवेली गया था, पर ये बच्चे क्यों गए थे ? उसने फिर से परमार
को बुलाया।
भौमिक- परमार, तुमने पता किया था
कि ये बच्चे वहां क्या करने गए थे ?
परमार- जी सर, मैंने पता किया था।
हवेली से कुछ दूर ही बच्चों की गाड़ी मिली थी, वो खराब हो गई थी। रात बिताने के लिए ये लोग वहां पहुँच गए थे। वहां पास के
गांव के कुछ लोगों ने ही उन्हें इस हवेली के बारे में बताया था।
भौमिक- ओके, परमार, अब तुम जल्दी से
जल्दी डाॅक्टर की जानकारी लंदन से मंगाने का कुछ करो।
परमार- मेरी बात हो
गई है सर, शाम तक उसकी पूरी जानकारी आपकी टेबल पर होगी।
भौमिक- ओके परमार।
परमार के जाने के
बाद भौमिक भी कुछ देर ऑफिस में रूक कर चला जाता है। शाम को जब वह ऑफिस आता है तो परमार
उसका इंतजार कर रहा था।
परमार- सर, लंदन से डाॅक्टर
अविनाश के संबंध में हमने जो जानकारी मांगी थी वह आ गई है।
भौमिक- वैरी गुड, परमार। तो क्या पता चला है?
परमार- सर, डाॅक्टर अविनाश
करीब 3 साल से भी ज्यादा समय तक लंदन में रहे थे। इस दौरान उन्होंने वहां से मनो
विज्ञान का पूरा कोर्स किया है और उसकी डिग्री भी ली है। इसके साथ ही वे जो प्रयोग
करना चाह रहे थे, वह यह था कि किसी भी मरीज को दिल बीमारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति को समझा
जा सके और उसे सम्मोहित कर बीमारी का इलाज किया जा सके। इससे ज्यादा उनके प्रयोग
के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
भौमिक- पर परमार
इससे भी हमारे केस को लेकर कोई सुराग नहीं मिल रहा है। हम केस में आगे कैसे बढ़े ?
परमार- मैंने भी इस
बारे में सोचा था सर। पर कुछ समझ नहीं आ रहा है। आखिर माजरा क्या है?
भौमिक- हां, परमार वहीं तो केस
साॅल्व कैसे होगा?
यहां से एक बार फिर
दोनों अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं। घर पहुंचकर भी भौमिक के दिमाग में सिर्फ केस को लेकर ही बातें चल रही
थी। वह बार-बार यही सोच रहा था कि कहीं से कुछ भी एक सुराग हाथ लगे। वो अपने दिमाग
में एक बार फिर पूरे केस की बातों को सोचता है। इसके बाद भी उसे कोई जवाब नहीं
मिलता है। रात के करीब दो बज चुके थे और उसे नींद नहीं आ रही थी। वह किसी भी हाल
में बस केस को साॅल्व करना चाह रहा था। मीडिया और उसके अधिकारी उस पर केस को जल्द
साॅल्व करने का दबाव बना रहे थे। भौमिक और परमार की हर कोशिश के बाद भी हत्या के
संबंध में कोई सुराग उनके हाथ नहीं लग रहा था।








Nice story
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